नॉर्वे के अखबार में अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर टिप्पणी, भारत की राजनीति पर उठे सवाल।
नॉर्वे के अखबार Dagsavisen में अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी और भारत में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी प्रकाशित हुई। लेख में लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।



नॉर्वे के अखबार Dagsavisen में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी और भारत में जारी राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक टिप्पणी प्रकाशित हुई है। लेख का शीर्षक 'Modis mareritt fortsetter' है, जिसका हिंदी अर्थ है ‘मोदी का दुःस्वप्न जारी है।’
अखबार की कमेंटेटर हेले लिंग स्वेंडसेन की इस टिप्पणी में दिपके की गिरफ्तारी, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे आंदोलन का उल्लेख किया गया है। लेखिका ने भारत में लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिपके और कॉकरोच जनता पार्टी के दो अन्य पदाधिकारियों को 10 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने कार्रवाई के पीछे प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का कारण बताया। अगले दिन तीनों को कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया।

















