नई दिल्ली। भारत में टीवी रेटिंग का संकट लगातार बना हुआ है। रेटिंग व्यवस्था में देरी से टीवी चैनलों और विज्ञापनदाताओं की मुश्किलें बढ़ रही हैं। इसी बीच Google, YouTube को टेलीविजन के मुकाबले बेहतर विज्ञापन विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह (GoM) की दूसरी बैठक अब तक नहीं हो सकी है।

YouTube के ROI को लेकर Google का दावा

BestMediaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, Google का दावा है कि YouTube पर विज्ञापन निवेश से मिलने वाला प्रतिफल (ROI), लीनियर टीवी से 1.98 गुना और OTT प्लेटफॉर्म से 1.94 गुना है। कंपनी ने इन आंकड़ों के लिए 2021 से 2025 के बीच भारत के CPG क्षेत्र से जुड़े मार्केटिंग मिक्स मॉडलिंग अध्ययनों का हवाला दिया है।

Google ने मैगी के एक अभियान का उदाहरण देते हुए बताया कि YouTube CTV और पारंपरिक टीवी के संयुक्त इस्तेमाल से 15.6 करोड़ विशिष्ट दर्शकों तक पहुंच बनी, जिसमें YouTube CTV का योगदान पांच प्रतिशत अंक रहा। हालांकि, उपलब्ध प्रचार सामग्री में दोनों माध्यमों की लागत और प्रदर्शन का पूरा तुलनात्मक विवरण नहीं है।

रेटिंग के बिना विज्ञापन बाजार में अनिश्चितता

टीवी रेटिंग विज्ञापनदाताओं को चैनलों की पहुंच और विज्ञापन प्रदर्शन का आकलन करने में मदद करती है। इसके अभाव में विज्ञापन बजट तय करना और निवेश के परिणामों को प्रमाणित करना मुश्किल हो सकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म जहां मापने योग्य परिणामों के जरिए विज्ञापनदाताओं को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं पारंपरिक टीवी की व्यापक पहुंच अब भी महत्वपूर्ण है।

अब टीवी इंडस्ट्री की निगाहें रेटिंग संकट के समाधान पर टिकी हैं। सरकारी स्तर पर फैसले में देरी और डिजिटल विज्ञापन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि टीवी चैनल विज्ञापनदाताओं का भरोसा कैसे बनाए रखेंगे।