आयोजकों का उद्देश्य शिवाजी महाराज के साहस, नेतृत्व, राष्ट्रनिष्ठा और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। डॉ. गौतम ने कहा कि आज के समय में युवाओं को उनके आदर्शों से परिचित कराना जरूरी है, ताकि वे इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाएं।
250 कलाकार मंच पर जीवंत करेंगे इतिहास
सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन शाम 4:30 बजे से लगभग चार घंटे तक महानाट्य का मंचन होगा। इसमें करीब 250 कलाकार हिस्सा लेंगे। हाथियों, घोड़ों, ऊंटों, तोपों, तलवारों और ऐतिहासिक किलों की प्रतिकृतियों के जरिए शिवाजी महाराज के जीवन की प्रमुख घटनाओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
सिंहगढ़, प्रतापगढ़ और रायगढ़ जैसे किलों की झलक दर्शकों को उस ऐतिहासिक दौर का अनुभव कराने का प्रयास करेगी, जब स्वराज्य की स्थापना के लिए साहस, रणनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रचेतना और सांस्कृतिक गौरव का संदेश
मिशन के मुताबिक, ‘जाणता राजा’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कार और राष्ट्रचेतना से जुड़ने का माध्यम है। इसका विशेष उद्देश्य युवाओं को शिवाजी महाराज, माता जीजाबाई और समर्थ गुरु रामदास के विचारों से परिचित कराना है।
आयोजन की मंगलकामना के लिए सनसिटी स्थित ‘शिव अवतरण मंडपम्’ में रुद्राभिषेक भी किया जा रहा है, जो 28 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इससे पहले मिशन लखनऊ और आगरा में भी इस महानाट्य का आयोजन कर चुका है।
कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना
आयोजकों के अनुसार, आयोजन के अलग-अलग दिनों में राजनीति, धर्म, अध्यात्म और उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और अन्य विशिष्ट अतिथियों के नाम शामिल हैं। कुछ राजनीतिक हस्तियों की भागीदारी प्रस्तावित है।
आयोजकों को उम्मीद है कि प्रतिदिन लगभग 15 हजार दर्शक इस महानाट्य को देखने पहुंचेंगे। दिल्ली-एनसीआर के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना जताई गई है।
युवाओं को जोड़ने के लिए व्यापक तैयारियां
दिव्य प्रेम सेवा मिशन की टीमें मार्च 2026 से आयोजन की तैयारियों में जुटी हैं। मिशन के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में अब तक 300 से अधिक बैठकें, गोष्ठियां और सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों से भी संपर्क किया गया है, ताकि युवा इस ऐतिहासिक प्रस्तुति से जुड़ सकें।
‘जाणता राजा’ के जरिए आयोजकों की कोशिश है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और स्वराज्य की भावना केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी के विचारों और जीवन का हिस्सा बने।