नई दिल्ली: विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान कथित तौर पर दो बार हिरासत में लिए गए मोलिटिक्स के पत्रकार अमान रस्तोगी ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शीर्ष अदालत के उन निर्देशों का उल्लंघन किया, जिनके तहत पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, याचिका में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, नई दिल्ली जिले के डीसीपी और कमला मार्केट थाने के एसएचओ को पक्षकार बनाया गया है। रस्तोगी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।

दो बार हिरासत में लेने का आरोप

याचिका के अनुसार, रस्तोगी को रविवार को कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शन की कवरेज करते समय हिरासत में लिया गया। उनका आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों और एक नाबालिग को हिरासत में लेने पर पुलिस से सवाल किया था, जिसके बाद उन्हें भी पकड़ लिया गया। उस समय उनकी प्रेस आईडी दिखाई दे रही थी।

रस्तोगी का आरोप है कि सोमवार को मिंटो रोड के पास उन्हें फिर हिरासत में लिया गया और उनकी प्रेस आईडी नाले में फेंक दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों घटनाओं में हिरासत का मेमो नहीं बनाया गया।

पुलिस से मांगा जवाब

याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त से हलफनामा दाखिल कर हिरासत का कानूनी आधार बताने की मांग की गई है। साथ ही, संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान, पुलिस रिकॉर्ड और इलाके में निषेधाज्ञा लागू होने से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।

इस मामले के अलावा, नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने भी प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। फ्री स्पीच कलेक्टिव ने भी पत्रकारों को हिरासत में लेने के मामले में अवमानना कार्रवाई की मांग की है।

इन घटनाओं ने प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और पुलिस की जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।